इस पर सभी पुरुष खिलखिलाकर हँस पड़े, बिना यह अहसास किए कि यह टिप्पणी लिंग के आधार पर भेदभाव से भरी थी। इस किस्म की टिप्पणी कोई पुरुष, किसी पुरुष सहकर्मी के लिए नहीं करेगा। यह मानसिकता सांस्कृतिक कंडीशनिंग को प्रतिबिंबित करती है जिसे पूरी तरह से खत्म होने में शताब्दियाँ लगेंगी।