केतु और सूर्य की युक्ति बहुत कम देखी जाती है।इस युक्ति के कारण जातक हमेसा कमर का दर्द हड्डियों में दर्द से परेशान रहेगा।अगर ये युक्ति 4थ भाव में हुई सूर्य के नक्षत्र या केतु के नक्षत्र में जातक के घर में कोई व्यक्ति आत्महत्या अवश्य करेगा।
इस युति से जातक के पुरुष संतति अवश्य होगी।जो जातक के परिवार में बडा भारी नाम और काम करेगी।जातक का सरकारी क्षेत्र में प्रभाव होगा।
सूर्य + केतु की यह युति आध्यात्मिक उन्नति का द्योतक है।सूर्य आत्मा है तो केतु आध्यात्म।मोक्ष का कारक ग्रह है।यदि यह प्रति नकारात्मक है तो जातक अहंकारी होगा।
यह युति यदि जन्मकुंडली के 1,3,5,10,12 हो तो इस प्रति का शुभ प्रभाव जातक के जीवन पर पडेगा।
मोतियाबिंद का आपरेशन जीवन में होगा।और जन्म कुंडली के 4th हाउस में सूर्य देव नक्षेत्र या उप नक्षेत्र के रूप में इंटरफेयर कर रहे है एवं साथ में सूर्यदेव ग्रह के रूप में उच्च राशि के बैठे हुए है या स्वक्षेत्री बैठे हुए है......तो ऐसी कंडीशन में जातक को हेवी रेंज की लक्ज़री गाड़ियों का ना सिर्फ शौक रहता है बल्कि उसे प्राप्त भी होती है।इस युक्ति के दुष्परिणामो से बचने के लिए कुंडली के अनुसार उचित उपाय करे।
दीक्षा राठी 7059126981